आज की चौथी औद्योगिक क्रांति में एजुकेशन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब डिग्रियों के साथ-साथ टेक्निकल स्किल्स और इनोवेशन की जरूरत बढ़ गई है। स्टार्टअप्स और एआई इकोनॉमिक ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए, इन कॉन्सेप्ट्स को एजुकेशन में शामिल करना युवाओं को फ्यूचर के लिए तैयार कर सकता है।
समय काल और परिस्थिति हमेशा से ही बदलती रही है। इन बदली हुई परिस्थिति के अनुरूप खुद को बदलने की आवश्यकता हमेशा से ही रही है। जो व्यक्ति बदलते हुए समय के अनुसार स्वयं को नहीं बदलता, वो हमेशा ही विकास की दौड़ में पिछड़ जाता है।
अगर आप टॉप पांच स्टार्टअप कम्पनीज का नाम जानना चाहते हैं तो स्टार्टअप इको सिस्टम रैंकिंग के अनुसार यूके, यूएस, चायना, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी इन सब देशों के नाम आते हैं। स्टार्टअप इको सिस्टम रैंकिंग के अनुसार भारत विश्व में अग्रणी स्टार्टअप देशों में 19वें स्थान पर है, वहीं स्टेनफोर्ड AI इंडेक्स के सर्वे के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत चौथे स्थान पर है।
वास्तव में अगर हमें कदम से कदम बढ़ाकर विश्व गुरु बनना है तो हमें आज की परिस्थिति में नौकरी लेने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनना होगा। आज का युग परिवर्तन का युग है। तकनीक, नवाचार और शिक्षा मिलकर जिस गति से समाज को नया आकार दे रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। भारत इस परिवर्तनशील समय में एक नई ऊर्जा और संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।
आज के बदले हुए परिवेश में मुझे दो बातों की सर्वाधिक प्रेम, स्नेह व सम्मान के साथ आवश्यकता प्रतीत होती है-
- शिक्षण संस्थान का स्टार्टअप विचारधारा से जुड़ना।
- युवाओं का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ना।
मेरा मानना है कि अगर आधुनिक शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व स्टार्टअप के लिए एक अच्छा इको सिस्टम विकसित कर दिया जाए तो हमारे देश में बहुत अधिक आर्थिक विकास हो सकता है और बेरोजगारी की समस्या भी कम हो सकती है।
डॉ. संजय बियानी काउंसलिंग सेल इन दोनों दिशाओं में कार्य कर रहा है। विद्यार्थियों को वर्तमान शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ स्टार्टअप व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ रहा है। इसके लिए ब्रिज कोर्स बनाया गया है और एक अच्छा इको सिस्टम भी तैयार किया गया है। हमारा मानना है कि आने वाले समय में इन सभी प्रयासों से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में काफी मदद मिलेगी।
आगामी नए सत्र में नए विद्यार्थी प्रवेश लेने जा रहे हैं। यह बहुत आवश्यक है कि वे पाठ्यक्रम का चयन करते समय अपनी रुचि का ध्यान रखें। बहुत अच्छा होगा कि वे बियानी काउंसलिंग सेल के करियर काउंसलिंग विशेषज्ञों की मदद लें।