आज बच्चों में तनाव और अवसाद घर कर चुका है। हम इंजीनियरिंग और बड़े भी शिक्षण संस्थानों में आये दिन बच्चों की आत्महत्या की खबर सुनते है। जिसे सुनकर दुख तो होता है लेकिन उसकी असल वजह को हम नजरअंदाज कर देते है। जबकि हमें जानना होगा कि इसका मूल कारण क्या है? और इसका मूल कारण है बच्चों से अनगिनत अपेक्षाएँ। हम अपने स्वयं के अधूरे सपनों को पूरा करने की चेष्ठा बच्चों से करते है। जिस कारण बच्चों में छुपी हुई प्रतिभा बाहर नहीं आ पाती या समाज के डर से हम उसे छुपा देते हैं।
” जहां दुनिया और भारत की अर्थव्यवस्था युवाओं को हर क्षेत्र में कॅरियर बनाने के अवसर उपलब्ध करा रही है।
वहीं हमारी रूढ़ीवादी मानसिकता बच्चों को अंधकार की और धकेल रही है। आज भी हम अपने बच्चें का भविष्य डॉक्टर और इंजिनियर बनाने में सुरक्षित समझते है जबकि यह हमारी भूल है। हम अक्सर अपने बच्चों की स्वाभाविक क्षमताओं को नजर अंदाज करते है और ऐसा कॅरियर चुनने पर मजबूर करते है। जिसमें ना तो उनकी रूचि होती है और ना ही वे उसमें सक्षम होते हैं। यही कारण है कि आज बच्चों में तनाव और अवसाद घर कर चुका है। हम इंजीनियरिंग और बड़े शिक्षण संस्थानों में आये दिन बच्चों की आत्महत्या की खबर सुनते है। जिसे सुनकर दुख तो होता है लेकिन उसकी असल वजह को हम नजरअंदाज कर देते है। जबकि हमें जानना होगा कि इसका मूल कारण क्या है? और इसका मूल कारण है बच्चों से अनगिनत अपेक्षाएँ। हम अपने स्वयं के अधूरे सपनों को पूरा करने की चेष्ठछ बच्चों से करते है। जिस कारण बच्चों में छुपी हुई प्रतिभा बाहर नहीं आ पात्ती या समाज के डर से हम उसे छिपा देते हैं।
प्रतिभा की पहचान का महत्व
अगर पीवी सिंधू, विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर और महेन्द्र सिंह धोनी जैसे प्रतिभावान खिलाड़यिों के माता-पिता ने भी उनकी प्रतिभाओं को नजरअंदाज कर दिया होता तो क्या आज वो हमारे देश का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा कर पाते? अगर ऐसा हुआ होता तो ना जाने भारत के ये सितारे जगमगाने से पहले ही गुमनामी के अंधेर में कहीं लुप्त हो चुके होते। हर बच्चें के अन्दर कुछ न कुछ प्रतिभा छिपी होती है और हर माता-पिता और शिक्षक का दायित्व है कि वह उनकी प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारने का प्रयास करें। कोई बच्चा अच्छा एक्टर हो सकता है, अथवा स्वयं का स्टार्टअप भी कर सकता है। अच्छा गाना गा सकता है या फिर अच्छा पेन्टर भी बन सकता है, आवश्यक है कि उनकी प्रतिभा को निखारा जाये।
करियर चुनाव और सोच में बदलाव
सिर्फ पैसा ही कॅरियर के चुनाव का आधार नहीं होना चाहिए। क्योंकि आप जो काम करते है उसे अगर दिल से करें तो उसके बदले मिली खुशी पैसे कमाने से भी कहीं ज्यादा है। इसमें भी कोई शक नहीं है कि इस कर्म के परिणाम से धन भी प्रचुर कमाया जा सकता है।
ही केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना सफलता का मापदण्ड नहीं है। हमारे देश में कई ऐसे उदाहरण है जिन्होंने नवाचारों से अपनी अलग पहचान बनाई है। इनमें शामिल है गिरनार साफ्ट के अमित जैन, ओयो रूम्स के रितेश अग्रवाल, ओला कैब्स के भावेश अग्रवाल और अंकित भाटी जैसी शख्सियतों
ने अपने बिजनेस मॉडल से देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अलग स्न्टखेन्योरशिप का उदाहरण पेश किया है। इनमें से कई लोग ऐसे भी है। जिन्होंने विदेश में अपनी शिक्षा हासिल की और वापिस लौटकर अपने देश को सशक्त बनाने का बीड़ा उठाया है। भारत सरकार ने युवाओं की जरूरतों को समझते हुए कौशल विकास और स्टार्टअप इण्डिया जैसी कई विकासशील योजनायें शुरू की है ताकि भारत का युवा अपनी रूचि और सामथ्र्य के अनुसार स्वयं का भविष्य संवार सके। इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकारे अनेक योजनाओं के तहत सब्सिडी और ग्रांट भी प्रदान कर रही है।
रोजगार और कौशल विकास
युवाओं को हर क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इसके लिए उन्हें कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके तहत कॉलेज और विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम चलाने और रोजगार दिलाने के लिये ग्रांट्स प्रदान किये जा रहे है। शिक्षण संस्थाओं में इन्क्यूबेशन और इन्टरप्रन्योरशिप सेल खोले जा रहे है। जहां भावी उद्यमी अपने विचारों को मूर्त रूप दे सकें। इसके लिए संस्थाएं ना सिर्फ ट्रेनिंग दे रही हैं बल्कि फडिंग भी प्रदान करने में सहयोग कर रही हैं।
अभिभावकों की भूमिका और समाधान
अब जरूरत इस बात की है कि अभिभावकों को जागरूक होना होगा और अपने बच्चों की प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें अपना कॅरियर चुनने की आजादी देनी होगी। अन्यथा युवा अपना समय व ऊर्जा दोनों फेसबुक, इंस्टाग्राम पर रील बनाकर अपलोड करने में व्यर्थ कर रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कॉलेज द्वारा साइक्लोजिकल व एप्टीट्यूड काउंसलिंग सेशन निःशुल्क विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है। इस सेशन के माध्यम से आसानी से वैज्ञानिक तरीकों से पता लगाया जा रहा है कि किस विद्यार्थी में कौनसी प्रतिभा छुपी है।
निष्कर्ष
अंत में एक बात और कहना चाहेंगे कि हर युवा विशिष्ट योग्यता रखता है, इसी योग्यता के अनुरूप उन्हें कॅरियर का चुनाव करना चाहिए ताकि उनकी एकाग्रता व ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग किया जा सके। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो हम सभी ऊर्जा के रूप हैं, हमारे शरीर में असंख्य कोशिकाएं हैं, इन कोशिकाओं का संचालन बुद्धि से भी अधिक भाव इमोशन द्वारा होता है।