बहुत ही कम अभिभावक बच्चों से जीवन के बारे मे बात करते हैं। बहुत ही कम अभिभावक दिन प्रतिदिन की दिनचर्या में बच्चों से कृतज्ञता, सकारात्मकता, क्षमा करने की आदत, क्यभाव, प्रकृति से प्रेम के संबंध में कोई बात करते हैं।
जीवन वास्तव में सफलता और असफलता दोनों से मिलकर बनता है। या यूं कहें कि हर असफलता के बाद सफलता तथा हर असफलता के बाद सफलता मिलती ही है।
हाल ही में 34 वर्षीय एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी की खबर ने हम सभी को आहत किया है। इस खबर को पढ़कर सभी अभिभावक बड़े परेशान हुए हैं। सभी यह सोचने को मजबूर हो गए हैं कि बॉलीवुड का एक मशहूर कलाकार जब डिप्रेशन में ऐसा कृत्य कर सकता है तो फिर आज की युवा पीढ़ी जो बेरोजगारी से परेशान है, उनका क्या हाल होगा?
आप सब यह जानना चाह रहे होंगे कि यह किस कारण से हुआ? एक काउंसलर के कारण मुझे यह उचित लगा कि इस घटना के कारण व उपचार के संबंध में आपसे अपनी समझ साझा करूं।
पहला कारण: शिक्षा प्रणाली
आज हमारी शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को भौतिक सफलताओं को पाने व बढ़ने पर लगभग पूर्ण रूप से केंद्रित हो गई है। अभिभावक भी मुख्य रूप से बच्चों को अधिकाधिक अंक प्राप्त करने के लिए सिर्फ स्कूल व कॉलेज ही नहीं भेजते बल्कि कोचिंग संस्थाओं मे बड़ा खर्च कर बच्चों को कोचिंग करवाते हैं।
इस कारण उनका पूरा ध्यान बच्चों को किताबी ज्ञान और परीक्षा में अंक प्राप्त करने पर लग जाता है। बहुत ही कम अभिभावक बच्चों से जीवन के बारे मे आत करते हैं। बहुत ही कम अभिभावक दिन प्रतिदिन की दिनचर्या में बच्चों से कृतज्ञता सकारात्मकता, क्षमा करने की आदत, दयाभाव प्रकृति से प्रेम के संबंध में कोई बात करते हैं।
जीवन वास्तव में सफलता और असफलता दोनों से मिलकर बनता है या यूं कहें कि हर असफलता के बाद सफलता तथा हर असफलता के बाद सफलता मिलती ही है।
हर बच्चे को यह समझाया जाना चाहिए कि असफलता बहुत बहुमुल्य है असफलता के कारण हमारे जीवन में ज्ञान व अनुभव बढ़ता है जो आगे जाकर किसी बड़ी सफलता का कारण बनता है।
सभी अभिभावकों को अपने अपने बहुमूल्य समय में से कुछ समय निकालकर अपने बच्चों से जीवन से संबंधित अपने अनुभवों को साझा करना चाहिए। भविष्य में जब भी उन्हें असफलता का सामना करना पड़े तो वे उस समय में सहज रह सके।
‘मन का हो तो अच्छा और मन का ना हो तो भी अच्छा है, क्योंकि उसमें ईश्वर की मर्जी है।’
दूसरा कारण: विचार और जैविक प्रक्रिया
दूसरा कारण विचारों से जैविक प्रक्रिया का गहरा संबंध है। आज समाज का एक बहुत बड़ा तबका तार्किक होता जा रहा है। हर बात के पीछे, हर व्यक्ति के पास बहुत गहरे तर्क हैं। अधिक तार्किक हो जाना भी डिप्रेशन का एक प्रमुख कारण है।
जब हम प्रेम से भरे होते हैं तो हमारे मन में उठ रहे विचारों के कारण जैविक प्रक्रिया प्रारम्भ होती है। उसके कारण axytocin hormones स्त्रावित होने लगते है। जिसके कारण हमारा भावात्मक स्वास्थ्य अच्छा होने लगता है।
दूसरी ओर एक और महत्वपूर्ण हार्मोन है जिसका नाम Serotonin hormone है। जब मनुष्य बहुत अधिक तर्कशील हो जाता है तो इस हार्मोन का स्त्राव कम हो जाता है। इसके परिणाम स्वरूप इंसान की निर्णय क्षमता व विवेक शक्ति कमजोर होने लगती है। जिसके परिणामस्वरूप डिप्रेशन के दौरान उसके मन मे आत्महत्या का विचार स्थिर हो जाता है।
इस समस्या से बचने के लिए यह आवश्यक है कि प्रतिदिन हम चरित्रवान व्यक्तियों के विचारों व आध्यात्मिक पुस्तकों का पठन करें। इससे हमारे अंदर सकारात्मक विचारों का प्रवाह होगा।
तीसरा कारण: खानपान
हमारे प्रतिदिन की जिंदगी में फास्ट फूड व प्रोसेस्ड फूड की अधिकता हमारे शरीर में जड़ता (inersia) लेकर आती है। इसके परिणाम स्वरूप इंसान अपनी संवेदनशीलता को खो बैठता है।
इसे दूर करने के लिए जैविक फूड (Live food) यथा फल, सब्जियां, अंकुरित पदार्थ, दूध आदि का प्रयोग खानपान में अधिकाधिक किया जाना चाहिए।
समाधान और काउंसलिंग
इसके अतिरिक्त जब हमे यह पता चल जाए कि घर में कोई सदस्य डिप्रेशन में है तो हमें योग्य अनुभवी कांउंसलर की मदद भी लेनी चाहिए।
काउंसलिंग में हमने सदैव पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तिगत काउंसलिंग व ग्रुप काउंसलिंग पर प्रमुख रूप से ध्यान दिया है। हमारी सदैव से यह कोशिश रही है कि बच्चों में उत्साह उमंग और सकारात्मक विचार दिए जाएं।
इस हेतु सोच विचारकर विशेष रूप से साइकोलॉजिकल व विशिष्ट पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि छात्र-छात्राओं को साइकोलॉजिकल एप्टिट्यूड (Psychological aptitude) काउंसलिंग प्रदान की जाए ताकि उनको उनकी रुचि व क्षमता को देखकर सही कोर्स में प्रवेश दिया जा सके जिससे भविष्य में उन्हें निराशा व हीन भावना का सामना ना करना पड़े।
संस्था द्वारा युवाओं को प्रत्येक गुरुवार व रविवार को कॅरियर व साइकोलोजिकल काउंसलिंग विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क प्रदान की जाती है।
सस्नेह, प्रेम और सम्मान के साथ…