Success and Psychology

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प्र.1 जीत क्या है? इसे कैसे समझा जा सकता है और जीत व मनोवृत्ति में आप क्या संयोग देखते हैं?
उत्तर : हर व्यकित अपने जीवन में सफल होना चाहता है पर वह यह नही जानता कि जीत में कौनसे तत्व होते हैं? मैने इस पर बहुत काम किया और जीत की एक मैटि्रक्स बनार्इ। जिसे परिक्षित किया तमाम उन सब लोगों पे जो या तो एंटरप्रेन्योर बने या जिन्होंने अपने जीवन में अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जीत के पैरामीटर होते कुछ और हैं और हम अपनाते हैं कुछ और। शायद यही एक बड़ा कारण है जो हमें असफलता की ओर ले जाता है। आज पूरा समाज ज्ञान पर चर्चा करता है। यह माना जाता है कि बहुत ज्ञान है किताबों में। पर चाहे हम कितना ही किताबी ज्ञान अर्जित कर लें लेकिन जब तक जीवन व्यवहार नहीं अपनाया, तब तक अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकते। और व्यवहार में ऐसे कर्इ उदाहरण मिलेंगे जिन्होंने कभी किताबें पढ़ी नहीं लेकिन अपने करियर में मुकाम हासिल किया। जो ऊँचार्इ और मंजिल वो पाना चाहते थे वहाँ तक पहुंचे। यहां तक यह सुनने में अविश्वसनीय सा ही लगता है कि ऐसे व्यकित जो ब्वससमहम क्तवचवनज थे वो किताबों से बाहर निकले। और इसे सिद्ध करने के लिए मैने तमाम ऐसे लोगों को इंटरव्यू लिया और यह सत्यापित किया कि –

 जीत में ज्ञान का भाग केवल 5 प्रतिशत ही है।
 कौशल विकास की बात करे तो माना जाता है यूथ को व्यावहारिक तौर पर काम करना आना चाहिए और इसको जांचने के बाद पता चला कि कौशल का भाग भी जीत में सिर्फ 5 प्रतिशत ही है।
अर्थात ये दोनों बाते जिसकी चर्चाएँ चल रही हैं वो सिर्फ 10 प्रतिशत में ही सिमट के रह जाती हैं।
 इससे भी ज्यादा मजेदार बात यह है कि हमारे विधालय, महाविधालय व घर परिवार बच्चों में अनुशासन की भावना को विकसित करना चाहते हैं लेकिन जब इस अनुशाासन को जीत के पैरामीटर से संबंधित किया तो पाया कि इसका भी मात्र 10 प्रतिशत भाग हमारी जीत में है।
यानि ज्ञान 5 प्रतिशत, कौशल 5 प्रतिशत और अनुशासन 10 प्रतिशत अब प्रश्न यह उठता है कि जीत में आखिर महत्वपूर्ण भाग किसका है?
 हमें यह जानकर आश्चर्य होगा इसमें 40 प्रतिशत भाग है हमारे नजरिये का। आपका अपनी लार्इफ के प्रति नजरिया कैसा है और शेष 40 प्रतिशत भाग जीत में आपकी उमंग व आपके उत्साह का है। यही नहीं बलिक यह भी कहा जा सकता है कि इन दोनों तत्वों का हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रभाव पड़ता है बात करें हमारे करियर की तो महत्वपूर्ण यह है कि हम किसी भी प्रोफेश न को कितना एंजाय कर रहे हैं या मात्र सिर्फ औपचारिकताएँ निभा रहे हैं।


प्र.2 सकारात्मक नजरिये व उत्साह का हमारे जीवन में क्या रोल है?
उत्तर
: अगर आपका नजरिया सही व सकारात्मक है व ज्ञान कुछ मात्रा में कम है तो भी आपका नजरिया ही है जो आपके लक्ष्य को हासिल करने में आपकी मदद कर सकता है। अगर आपने अनुशासन है तो भी आपका विकास संभव है मगर आपका नजरिया ही गलत है तो मान लीजिए आप मात्र औपचारिकताएँ ही कर रहे हैं।
प्र.3 हम अपने जीवन में सकारात्मक नजरिये को कैसे अपनायें ? इसे हम अपने जीवन में कहाँ से व कैसे शुरू करें?
उत्तर :
हम आपको बताना चाहेंगे कि हम कितने खुशनसीब हैं कि हमने मनुष्य योनि में जन्म लिया है अगर र्इश्वर चाहता तो हम पेड़-पौधे या फिर जंगली जानवर भी हो सकते थे। सिर्फ यही वो एकमात्र वजह है जिसके लिये हम उस खुदा को, र्इश्वर को उस परम शकित को शुक्रिया देना चाहिए जो हम नहीं पाते। इसलिये हमें सबसे पहले शुक्रिया बोलना शुरू करना चाहिए। देखिए हमें कितनी सारी चीजें उस र्इश्वर से प्राप्त हैं। लेकिन हम सब लोग पानी की तरफ चले हुए हैं। हम सभी में कृतघन्ता बढ़ती जा रही है और अगर हम सब कृतज्ञ हो जायें तो ये सृषिट हमें वो सब कुछ लौटा देगी जो हम चाहते हैं और जिसके हम हकदार हैं।


प्र.4 हमारे मन में हमेशा एक भव्य बना रहता है कभी परीक्षाओं को लेकर कभी अंकों को लेकर तो कभी हारने का भय हम इन चीजों से ऊपर कैसे उठें?
उत्तर
: इसका सबसे सही व महत्वपूर्ण तरीका हमें अपने डर से बचने या भागने की बजाय जीवन में सकारात्मकता को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए जिसका सरल तरीका मात्र एक शब्द शुक्रिया है। जिसे हिन्दी में धन्यवाद अंग्रेजी में Thank you व उदर्ू में शुक्रिया व जापानी में अरिगातो बोला जाता है। ये एक बहुत ही खूबसूरत शब्द है लेकिन आप देखेंगे कि हर एक वो शख्स जो इसे जीवन में कम प्रयोग करता है अधिक नकारात्मक बन गया है । हमारी जिन्दगी में से वो सब चीजें निकाल ली जाती हैं जिनके प्रति हमारा नजरिया नकारात्मक है या जिसकी हमें अहमियत नहीं है। चाहे वो फिर स्वास्थ्य हो, पैसा हो, व्यवसाय हो या फिर हमारे रिश्ते। वो सब कम होते जाते हैं जिन्हें हम महत्व नहीं देते।
प्र.5 क्या जीवन में कृतज्ञता अपनाने व नकारात्मकता निकालने से इनका प्रभाव हमारी वृद्धि व विकास पर पड़ता है?
उत्तर :
कृतज्ञता का संतुषिट से कोर्इ गहरा संबंध नहीं है। हम जिन चीजों को शुक्रिया बोलेंगे उनके प्रति हमारी ऊर्जा बढ़ेगी और हम अधिक योग्यता से काम करेंगे। इसीलिये कहा जा सकता है कृतज्ञता का मतलब संतुष्ट होना नहीं है। अगर हम अच्छा अनुभव करते हैं और अपने काम को एंजाय करते हैं तो हम अपने नियोक्ता के प्रति शुक्रिया का नजरिया रखते हैं। अगर ये नजरिया कम होगा तो हम अपनी सर्विस को भी पूरी तरह प्रभावपूर्ण ढंग से नहीं कर पाते। मैं तमाम उन यूथ को संदेश देना चाहता हूँ जिन्होंने नकारात्मकता को स्थान दिया है। आपको सफल होने का बहुत ही सरल टिप्स बताया जा रहा है कि सकारात्मकता को भी अपने जीवन में स्थान दीजिए। और इसके लिये आपको एक ही शब्द को आजमाना है और उसे तरीके से बोलना है। सिर्फ बोलने से काम नहीं चलेगा क्योंकि ये बोलना तो सिर्फ वैसे ही लगता है जैसे हम बचपने में Jack in Jill went up the hill कविता बोलते थे जो सिर्फ हम बोलते थे लेकिन उसका मतलब नहीं समझ पाते थे कि हम क्या बोल रहे हैं। इसीलिये हमें बहुत तरीके से बोलना है। और बोलना ही पर्याप्त नहीं है उसे अपनाये खुद मे ढ़ाले व उसे महसूस करें। क्योंकि देखा जाये हम सब लोग विचार नही बलिक उस विचार से अधिक भावनाये है। तो अगर हम किसी काम के प्रति कृतज्ञता का अनुभव करते हैं तो ही उसका सही परिणाम आता है।


प्र.6 उत्साह हमारे जीवन में 40 प्रतिशत रोल रखता है, उसे जीवन मे कैसे अपनाये ?
उत्तर :
आज एक सच्चार्इ सुनिये ये बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द है सबसे पहले तो इसे तो इसे छोटा या आसान न समझा जायें। क्योंकि ये शब्द आपकी पूरी जिन्दगी को 3600 बदल सकता है। मैं आपको बताता हूँ कि इसे बोलना कैसे है- इसके तीन नियम है
1. एक शब्द तीन बार :
आप जिसको भी शुक्रिया बोले उसे नजर मिला के बात करें उसे एक बार ही नही बलिक एक साथ 3 बार Thank You बोलिये ताकि आपका सही चक्षु सम्पर्क हो, आप अपनी भावनाओं को पर्याप्त रूप से संप्रेषित कर सकें, आप अपने समय का सदुपयोग कर सकें, आप अपनी सच्चार्इ सामने वाले का दिखा सके व उसकी सच्चार्इ भी देख सकें।
2. उचित कारण दें :
आज से आप जब भी Thank You कहे तो उसका उचित कारण भी दें। जैसे कि आज मैने अपने पैन को शुकि्रया बोला तो उसका कारण दिया क्योंकि उसके बिना मैं काम सही ढंग से नही कर पाता। मैने आज माँ को भी शुक्रिया कहा क्योंकि माँ की भावनाओं को मै वास्तव में अनुभव करता हूँ कि अगर वो काम ना करे तो मै कभी भी समय पर काम नहीं कर पाऊंगा। इसलिये जब भी बोलना हो तो उसका कारण जरूर दें।
3. काम से पहले व बाद में शुक्रिया :
आप शुक्रिया काम होने से पहले भी बोलिये और काम खत्म होने के बाद भी । जिससे सामने वाले व्यकित पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा आपमें कृतज्ञता बढ़ती है।
ये तीन नियम हैं जिसके जरिये आप जीवन में सकारात्मकता बढ़ा सकते हैं। अगर आप इसे अपनायेंगे तो आप अधिक अच्छा अनुभव करेंगे। आपके व्यकितत्व में एक विश्वास झलकता है। आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहेगी। आपको कभी ब्यूटी पार्लर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आप अन्दर से खुश रहने लगेंगे। और जैसे ही आप अन्दर से खुश रहेंगे तो आपके काम भी बनने लगेंगे। आप अधिक उत्पादकता से काम करेंगे और सफलता को अर्जित कर पायेंगे।
यह है संयोजन सफलता और मनोवृत्ति का और यूथ अगर इसे सुनेंगे व अपने जीवन में आजमायेंगे तो उनकी मनचाही सफलता उन्हें जरूर मिलेगी। तो इसीलिये महज एक शब्द है ‘परिवर्तित नजरिया आपको सफलता दिला सकता है। तो सफलता को पहचानें, अपने आप को पहचानें और उन चीजों को अपनायें जो आपके जीवन को सकारात्मकता देती है। सकारात्मक नजरिया देती हैं। उत्साह बनाये रखें और जी तोड़ मेहनत करें। कामयाबी आपके कदम चूमेगी।

धन्यवाद !!!

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