क्या प्रेम करना अपराध है ?

Share this on :



आज के हजारों साल पहले चन्द्रगुप्त ने अपने गुरू चाणक्य से एक सवाल किया था मुझे धनानन की पुत्री से प्रेम हो गया है, क्या प्रेम करना गुनाह है ? तब से लेकर आज तक यह सवाल हर किसी के जेहन में बार-बार आता है। आधुनिक युग के बायॅफ्रेंड/गर्लफ्रेंड कल्चर में यह सवाल लगभग हर युवा के मन में रहता है। इन दिनों कई युवाओं ने मुझसे भी यह सवाल किया। उनका पूछना था कि क्यों हमारे घरवाले हमें प्रेम करने से रोकते है ? क्या प्रेम ताकत नहीं है ? क्या प्रेम एनर्जी नहीं है ? क्या प्रेम जीवन नहीं है ? प्रेम करना चाहिए या नहीं करना चाहिए ?
उस समय चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को जवाब दिया -चन्द्रगुप्त, तुम्हारे जीवन में अखण्ड भारत का महान लक्ष्य रख दिया गया है। इसलिए प्रेम में समय गंवाना कदाचित उचित नहीं है। इस जवाब की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है। अर्थात् अगर आपके जीवन में कोई महान लक्ष्य है, तो फिर उस लक्ष्य से प्रेम कीजिए फिर आपको सब छोटे लगने लगेगे। अभी जीवन में लक्ष्य का छोटा होना या लक्ष्य का ना होना इस तरह के उन्माद पैदा करता है। अगर वास्तव में आप बिना लक्ष्य के जीवन बिताना चाहते है तो मैं कहूंगा कि प्रेम कीजिए, बाॅयफ्रेंड बनाइए, गर्लफ्रेंड बनाइए। लेकिन हर चीज की एक उम्र होती है। जब हम युवावस्था में हो अर्थात 25 वर्ष की उम्र में हो तो उस समय तो सबसे महत्त्वपूर्ण यही है कि हम अपने लक्ष्य से प्रेम करें। प्रेम किसी व्यक्ति से ही हो यह जरूरी नहीं है। प्रेम तो सजीव या निर्जीव किसी वस्तु से भी किया जा सकता है प्रेम ही तो दुनिया की ताकत है।
प्रेम करना अपराध नहीं है लेकिन गलत वक्त पर गलत फैसला लेकर उसे प्रेम का नाम देना अपराध है।
अगर आपके जीवन में आपने कोई लक्ष्य तय कर लिया है, अगर आप आई.ए.एस, आर.ए.एस, सी.ए या डाॅक्टर बनना चाहते हे तो सबसे पहले अपने लक्ष्य से प्रेम करें। यही आपको शक्तिशाली बनाएगा, यही आपको महान् बनाएगा। ये फैसला आपके हाथ में है कि जीवन लक्ष्य से जीना है या बिना लक्ष्य के । अगर जीवन लक्ष्य के साथ जीना है तो निश्चित रूप से अपने लक्ष्य से प्रेम करें।

To know more about Prof. Sanjay Biyani visit www.sanjaybiyani.com

 

Dr. Sanjay Biyani
Share this on :

One thought on “क्या प्रेम करना अपराध है ?”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *