जीवन एक प्रतिध्वनि है।

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असली शिक्षा वह है जो कि वास्तविक जीवन से सम्बन्धित है। जो हममें व्यावहारिक ज्ञान, उद्देश्य और अच्छे आचरण का विकास करें। जैसा हम जीवन में कर्म करेंगे वैसा ही हमारे पास लौटकर आएगा।
कहते है कि बड़ी-बड़ी बाते करने से लोग बड़े नहीं बनते। जीवन में छोटी-छोटी बाते सीखे और उन्हें एप्लाई करें। यही असली मायने में सही शिक्षा है। हमें बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। दिन की शुरूआत एक सुन्दर मुस्कान ; smile के साथ सबकों (विश) wish करते हुए होनी चाहिए- ‘‘गुड मार्निंग! ‘हेव ए नाइस डे‘। यही हमारी सही अभिव्यक्ति है कि हम अपना जीवन कितनी सजगता; awareness से जी रहे है।
जीवन एक प्रतिध्वनि है। जैसा करेंगे वैसा ही आपके पास लौटकर आएगा। अगर आपमें कॉमनसेन्स है तो आपकी शिक्षा सही अर्थो में जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से सम्बन्धित है। जरूरी है । जरूरी है कि ‘प्रेक्टिकल एपरोच विकसित किया जाए। सिर्फ डिग्री या डिप्लोमा पाने से ही हम real life में एज्युकेट नहीं हो जाते। अर्थात डिग्री, डिप्लोमा हमें जीवन का वास्तविक सुख देने की गांरटी नहीं देते। आपकी चाल में दम होना चाहिए और दिमाग में object (लक्ष्य) होना चाहिए। आप जो चाहते है बस आपको वही मिल सकता है उससे ज्यादा कुछ नहीं मिलेगा। अतः जरूरी है कि एकाग्रता डवलप की जाए, लाइफ में लक्ष्य को लाया जाए और अच्छा आचरण विकसित किया जाए।
ऐसी समझ आपको लानी होगी क्योंकि आप ही एक उद्यमी है, प्रबंधक है या एक प्रशासक है लेकिन तब जब आपके पास सही शिक्षा ;Right Education है। इसी उद्देश्य के साथ अब हम भगवान गणेश को नमन करते है क्योंकि गणेश सफलता का मूर्त रूप है। (Ganesh is a symbolic form of success)
किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले गणेशजी की आराधना की जाती है ताकि कार्य सफलता से पूर्ण हो। हमारी रिलेशनशिप, बिजनेस, जॉब, हेल्थ सब कुछ दिनोंदिन बढ़ता रहे। गणेशजी का हर अंग कोई ना कोई संदेश देता है जैसे –
1) विशाल कर्ण – ध्यान से सुनें। ज्ञान ग्रहण करें ताकि सही निर्णय ले सके।
2) बड़ा सिर/विशाल मस्तक- बड़ी सोच रखे।
3) हाथ- एक हाथ कर्म करने का प्रतीक है तथा आशीर्वाद भी देता है और दूसरा हाथ उस क्रिया की प्रतिक्रिया को दर्शाता हे। यह कर्म के सिव्द्धान्त पर आधारित है।
4) सूंड- उच्च कुशलता एवं अनुकूलन का संदेश।
5) विशाल उदर – सहनशीलता। अच्छाई व बुराई दोनों बातों को कपहमेज करें।
6) एक दंत- अच्छा ग्रहण करंे एवं बुरा त्यागे।
7) सुक्ष्म नेत्र – एकाग्रता
8) पैर – विवेकशील व्यक्ति इस धरती से जुड़ा है।

अगर आप इस संदेश को समझेंगे तो ही सही अर्थो में प्रबंध सिद्धान्त को भी समझ सकेंगे और तभी आपको अधिक कुशलता, अच्छा स्वास्थ्य एवं समृद्धि प्राप्त होगी।

 

To know more about Prof. Sanjay Biyani visit www.sanjaybiyani.com

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