ईश्वर और प्रकृति पूर्ण (perfect) हैं

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मस्तिष्क अत्यंत शक्तिशाली है। आइए हम जानें कि हमारा मस्तिष्क किस प्रकार कार्य करता है- सर्वप्रथम जब हम सुनते है तो मस्तिष्क में बिम्ब बनता है। यदि मस्तिष्क एकाग्रचित होता है तो यह इच्छा शक्ति का विकास कर लेता है। यदि मस्तिष्क इच्छुक नहीं हो तो आपको कोई संदेश याद नहीं रह पाएगा। आपकों यह ज्ञात होना चाहिए कि समुचित रूप से कुछ भी कैसे याद रखा जाए और परीक्षा के समय सही उत्तर कैसे दिया जाए? हमारी क्या कमजोरियाँ है ? हमें परीक्षा में कम अंक क्यों प्राप्त होते हैं ? हम सैद्धान्तिक सामग्री क्यों नहीं याद रख पाते ? एकाग्रता की कमी के कारण हम जीवन में इच्छित उपलब्धि नहीं ले पाते।
चलिए हम मस्तिष्क को प्रशिक्षित करते है। एक प्रभावशाली मंत्र का बार-बार उच्चारण करते हैं। उच्चारण करते समय मस्तिष्क में कोई और विचार न लाएँ। इसे तीन बार उच्चारित कीजिए। पुनरावृत्ति आवश्यक है।
परन्तु पुनरावृत्ति के समय यदि आप यही सोचते रहते हैं कि मैं याद नहीं रख सकता, मैं परीक्षा के समय उत्तर भूल जाऊंगा तो ऐसा वास्तव में होगा। इन नकारात्मक विचारां के कारण हमारी संकल्प शक्ति क्षीण हो जाती है जब कि हमारे बीच अधिकांश लोग प्रतिभावान है । हम पूर्णतः सामान्य हैं। अब हम अपनी बौद्धिक शक्ति का परीक्षण करते हैं। हमस्वयं पर ध्यान केंद्रित करें और सर्वप्रथम निम्न मंत्र का अर्थ समझेंगे फिर इसकी पुनरावृत्ति इस आत्मविश्वास के साथ करेंगे कि हम इसे सही-सही रूप से बोल सकते हैं।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
इसका मतलब यह है कि प्रकृति पूर्ण (perfect) है जिसे हम बाहरी दुनिया कहते हैं साथ ही साथ हमारे अन्दर की चेतना भी पूर्ण (perfect) है। जिसे हम आत्मा, परमात्मा, ईश्वर और आन्तरिक शक्ति के रूप में जानते है। इस दिव्य शक्ति से ही सब सृजन हो रहा है।  

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