गणेशजी सफलता की प्रतिमूर्ति है।

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किसी भी कार्य को करने से पूर्व हम गणेश जी की पूजा-अर्चना करते हैं। इसके पीछे उद्देश्य होता है कि वह कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सके। हमारा बिजनेस, जॉब, कैरियर, रिलेशनशिप एवं हेल्थ सभी को हम उचित प्रकार से प्रगतिशील बना सके। हम चाहते है कि हम प्रतिदिन तरक्की करते रहे।
गणेशजी सफलता की प्रतिमूर्ति (symbol) है। उनके शरीर का प्रत्येक अंग हमें एक प्रेरणात्मक संदेश देता है जैसे-
1 विशाल कर्ण (Large Ears) – विशाल कर्ण हमें सिखाते है कि हम किसी भी बात को अधिक ध्यान से सुने और उसके सारांश को ग्रहण करें जिससे कि हम सही निर्णय ले सके और संतुलित जीवन का निर्वहन करें।
2 विशाल मस्तक (Big forehead) – गणेश जी बड़ा मस्तक हमें विशाल सोच रखने के लिए संदेश देता है। यह हमें सिखाता है कि हम हमेशा बड़ी सोच रखे। संकुचित सोच से हमारे विचार भी संकुचित हो जाते है। अत‘ हमारी विस्तृत सोच ही हमें ऊँचाइयों के मुकाम तक पहुँचा सकती है।
3 हाथ (Hands)- गणेश जी दायाँ हाथ कर्मनिष्ठ बनने के लिए अभिप्रेरित करता है। इसके साथ हमें आशीर्वाद भी देता है कि हम जो भी कर्म करें या जो भी उद्यम करें उसमें सफल अवश्य होवे। गणेशजी का बायाँ हाथ जिसमें लड्डू हैं वह कर्म के प्रतिफल को दर्शाता है अर्थात् हमें कर्म का प्रतिफल जो भी मिले उसे हम सहृदय ग्रहण करें।
4 सूंड (Trunk)- सूंड हमें सजग रहने का ज्ञान देती है आस-पास जो भी कुछ हो रहा है, उसके प्रति हम हमेशा जागृत रहे यानि पूरी सजगता (awareness) के साथ जिए।
5 विशाल उदर (Large Stomach) – गणेश जी का विशाल उदर सहनशीलता को दर्शाता है। हम हर अच्छी व बुरी बात को ग्रहण करना सीखे। बुरी बातों को स्वंय के भीतर ही डाइजेस्ट करें। हम सहनशील बने। दूसरों की बुराई न करके उनसे अच्छा लेने के लिए तत्पर रहें। सबसे महत्त्वपूर्ण संदेश है कि हम विपत्तियों से घबराएं नही और अच्छी व बुरी दोनों ही प्रकार की परिस्थितियों में संतुलित बने रहे।
6 एक दंत (One tusk)& – गणेश जी का एक दंत यह सिखाता है कि हम बाहरी सुन्दरता को महत्त्व न दे बल्कि आंतरिक सुन्दरता यानि मन की सुन्दरता को पहचाने। अगर मन सुन्दर होगा तो हमारे विचार भी पॉवरफुल बनेंगे और विचारों के प्रभाव से हमारे भीतर जो ऊर्जा उत्पन्न होगी वही हमारे चेहरे को अधिक ऊर्जावान व सुन्दर बनाएगी।
7 सुक्ष्म नेत्र (Small eyes) – सुक्ष्म नेत्र प्रतीक है एकाग्रता का अर्थात हम एकाग्रचित होना सीखे। अपने कार्य को करते समय दूरदर्शी भी बने।
8 सवारी चूहा (Mouse) – गणेश जी का वाहन चूहा भी प्रतीक है सक्रियता का । हम सदैव जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय एवं फुर्तीले बने रहें।
तो आइए हम भी सफलता के प्रतीक एवं आदर्श स्रोत के रूप में आराध्य देव गणपतिजी के संदेश को अपनाए और सकुशलता इसका पालन करे। हम सभी एक इस मंत्र का उच्चारण करें।
‘‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभः
निर्वघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
गणेशजी सफलता की प्रतिमूर्ति है।

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