अपने अवचेतन मन(subconscious mind)को पहचानिए

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maan

हमें प्रातःकाल अपने माता-पिता एवं गुरूजनों का अभिवादन करना चाहिए परन्तु इसके लिए जरूरी है कि हमारा अभिवादन करने का तरीका सर्वोतम हो। हमारे चेहरे पर एक सुन्दर मुस्कान हो और हम उसी मुस्कान के साथ उन्हें विशिष्ट तरीके से “Good Morning” बोले। हम सभी उस परमपिता परमेश्वर की संताने है जिनके जीवन में उस ऊर्जा का संचार हो रहा है जिसका केन्द्र वह ईश्वर ही हैं। परन्तु क्या हम उस ऊर्जा का सही प्रयोग कर पा रहे है या नहीं ? वास्तविक रूप से हमें इस ऊर्जा का इस्तेमाल सही दिशा में करना होगा। इसके लिए हमें अपने अवचेतन मन (subconscious mind) को अधिक पॉवरफुल बनाना होगा। यह हमारे मस्तिष्क का लगभग 90% है। हम प्रतिदिन केवल अपने चेतन मन (conscious mind) के 10% मस्तिष्क को ही काम में लेते है।
हमारा अवचेतन मन सभी प्रकार की चुनौतियों को साहसपूर्वक स्वीकार करता है और पहले ही उसके परिणाम हमारे मस्तिष्क पटल पर दर्शा देता है। गलत कार्यो के लिए यह मन मस्तिष्क को कभी भी स्वीकृति नहीं देता। अतः आवश्यक है कि हम इस 90% मस्तिष्क का बेहतर उपयोग करना सीखे।
जीवन जीना भी एक कला है। जीवन में ऊर्जा के साथ-साथ उत्साह व उमंग होनी चाहिए। कई बार हमारे सामने ऐसे मुकाम आते है जब हमें कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे पड़ाव में हम दो राह पर आ जाते है। हमारे पास दो ही रास्ते होते है, या तो हम चुनौतियों का स्वीकार करते हुए उनका निडरतापूर्वक सामना करे और या फिर भयभीत होकर या पीठ दिखाकार वहाँ से भाग जाए। जीवन में अगर हम समृद्धि चाहते है तो सबसे पहले जरूरी है कि हम अपने भीतर सच्ची लगन (Burning desire) को उत्पन्न करें। कार्य करने का जज्बा लाए और कुछ बड़ा सोचे क्यों कि बड़ी सोच से ही व्यक्ति बड़ा बनता है। इसके लिए शुरूआत करे छोटे कदमों से क्यों कि मंजिल बहुत दूर है। अपने लक्ष्य को पाने के लिए सही रणनीति (strategy) अपनाए। बड़ी सोच रखे और पूरी तन्मयता के साथ अपने कार्य को सम्पन्न करें। सच्चा विश्वास ही आपको आपके लक्ष्य तक ले जाएगा। आप ही बनेंगे इस समाज के आदर्श जो कि इस समाज में कुछ नया बदलाव ला सकेंगे। जरूरत है एकाग्रचितता की और परिवर्तनोन्मुखी बनने की।
दूसरी ओर हमेशा देने की भावना रखे लेने की नहीं। हम जितना दूसरों को देंगे उतना ही हमारे पास वापस लौटकर आएगा। स्वार्थ की भावना से दूर होकर हम दूसरों का और अपना भला कर सकते है। आइए हम अपनी पहचान स्वंय करे कि हम कितने सही है और हमारी ताकत क्या है और कमजोरियाँ क्या है? इनको परखें। हमारी यही ताकत हमारे परिवार, समाज, प्रदेश व राष्ट्र में जरूर कुछ क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी। तो लक्ष्य ज्यादा दूर नहीं है। जरूरत है कि हम अपने अवचेतन मन (subconscious mind) का कुशलता से इस्तेमाल करना सीखे।

 

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